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Monday, 13 February 2012
Wednesday, 8 February 2012
मेने उनके सू सू वाले भाग से अपनी चूत और नज़दीक रख दी
अब मे उनके सामने कमर के उपर से नंगी खड़ी थी. फिर अंकल ने मेरा पेंट भी निकाल दिया और अब मेरे पूरे जिस्म पे सिर्फ़ अंकल की दी हुई काले रंग की चड्डी ही थी. फिर उन्होने मुझे अपनी छाती से लगा दिया या कहो कि मुझे उनके अंदर समा दिया. मेरे दोनो पैरो को अपनी कमर पे लाते हुए मुझे कमर से उठा लिया और उस रूम मे रखे गये लाल मखमली गद्दे जेसे आसन पे बैठ गये. अंकल की गोद मे बैठी हुई थी और अंकल के होंठो को चूम रही थी और अपने हाथ अंकल के बालो मे घुमा रही थी.
अंकल ने मेरा चुंबन चालू रखते हुए मेरे हाथ अपने हाथो से पकड़ के बाजू पे जितना हो सके उतना खिच रहे थे, इस दोरान मेरे नंगे स्तन अंकल की छाती से दब रहे थे और वो लॉकेट हम दोनो के बीच की खाली जगह पर लटक रहा था, फिर अंकल हाथो को उपर करने लगे, और फिर मेरे हाथ को उनके सिर के उपर की ओर खिच रहे थे, मेरा चुंबन टूट गया और मेरा मूह उनकी छाती मे समा गया, उनके छाती के बाल मेरे पूरे चेहरे पे लग रहे थे और मुझे हल्का सा नशा च्छा रहा था. फिर अंकल ने हाथो को उपर की ओर सीधे करते हुए मुझे से कहा “ जया अब तुम मेरे हाथो को अपने सिर के उपर से खिचो”.
मेने ऐसा ही किया और अंकल का मूह मेरे स्तनो के बिचमे जहा उनका लॉकेट था वाहा आ गया, वो मुझे वाहा चूमने लगे और अपने हाथो से मेरे हाथो को छोड़ के मेरे कंधो से नीचे से अपने हाथ उपर ले जा के मेरे हाथो को मेरी पीठ की ओर खिच ने लगे, जिस से मेरे स्तन और भी हवा मे आगाये और उनके मूह के पास भी आए.
अंकल ने पहले मेरे लेफ्ट स्तन को चूमा, क्यूंकी वाहा मेरा दिल था , वाहा पर चूमते उन्होने मेरे स्तन के आगे के पॉइंट को भी चूम लिया जिसे निपल कहते है. मे इस अत्यंत नये अनुभव से काफ़ी लाल हो रही थी मेरी चूत मे भी कुछ हो रहा था. फिर अंकल ने मेरा राइट स्तन भी उसी तरह चूम लिया. और आख़िर मे मेरे होंठो को चूम के मुझे अपनी बाहो मे जाकड़ लिया. फिर हम थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहे और एक दूसरे की आँखो मे देखते रहे.
फिर अंकल ने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और खुद भी मेरे उपर लेट गये. हम ने लेती हुए एक दूसरे को बहुत ही ज्यदा वक़्त लेके चूम रहे थे. उसी दोरान उनका सू सू वाला भाग मेरी चूत के पास लग रहा था. फिर अंकल खड़े हुए और अपनी लंगोट निकाल दी. उस समय उनकी पीठ मेरी ओर थी सो मेने अंकल की गन्ड देख रही थी, उसपे हल्के सफेद रंग के बाल थे, फिर अंकल वैसे ही नीचे घुटनो पे बैठ गये और मेरी तरफ मूह करके मेरे पैरो के बिचमे आ ये.
फिर उन्होने मेरे पैरो को हवा मे उपर की ओर खीच दिया और सू सू वाला भाग मेरी चूत के पास रख दिया और मेरे पैरो की उंगलियो को अपने होंठो से चूमने लगे मुझे काफ़ी अच्छा लग रहा था, और वाहा मेरी चूत की योनि से कुछ निकल रहा था, सो मेने उनके सू सू वाले भाग से अपनी चूत और नज़दीक रख दी और मेरी चूत मे से कुछ गीला सा निकल गया. अंकल के सू सू वाले भाग को पता चला कि मेरी चूत से कुछ निकला है.
अंकल ने मुझे कहा “ जया शाबाश आज तुम्हे कुछ स्पेशल इनाम मिलेगा” और मे हल्का सा हंस दी.
अंकल ने मेरे पैरो को अपनी कमर पे रख के मेरे पेट पे अपना सू सू वाला भाग लगा के, मेरे स्तन को अपनी छाती से दबाते हुए, मेरे होंठो को चूमने लगे, और अपने दोनो हाथो की मुट्ठी मे मेरे घने बालो को पकड़ के पागल की तरह खीच रहे थे, मेरे बालो की जान निकली जा रही थी कई बार तो ज़ोर से खिच ने के साथ मेरे बाल टूट भी जाते थे. लेकिन मे उन्हे खुश देखना चाहती थी इस लिए मे ने कोई विरोध नही किया.
अंकल कई बार तो हल्का सा या फिर ज़ोर्से कही भी मेरे होंठो, गालो, गर्दन और स्तन पर काट लेते थे. 15 मिनट के बाद उन्होने मुझे छोड़ दिया और मेरी चूत के पास बैठ गये. फिर उन्होने मेरी चड्डी के लेफ्ट बाजू से उसे थोड़ा सा खोल दिया और अपना सू सू वाला भाग वाहा से लगाते हुए मेरी चड्डी के अंदर डाल दिया, उनका सू सू वाला भाग मेरी चड्डी मे उपर की ओर अटक गया. मानो ऐसा लग रहा था कि उनका सू सू वाला भाग मेरी चड्डी के अंदर ही है. और मे उनके इस बर्ताव से काफ़ी डरी हुई थी.
अंकल ने देखते ही कहा “ जया आज से तुम इसे लंड कह सकती हो. क्यूंकी आज तुमने अपनी चूत से कई बार पानी निकाला है ये उसका इनाम है. रही बात स्पेशल इनाम की तो आज के बाद हम जब भी मिलेंगे तो मेरे जिस्म पे कुछ नही होगा और तुम्हारे जिस्म पे ये चड्डी हो गी जो के मेरे लंड को अपने अंदर रखेगी, मानो मुझे अब कोई ऐसे वस्त्र नही पहनने पड़े गे जिस से मे अपने लंड को ढक सकु.
आज से ये मेरा लंड तुम्हारा हुवा और तुम हमेशा इसका ख़याल रखोगी कही ये तुम्हारी चड्डी से निकल ना जाए.” मेने कहा “ जैसा आप कहो “.
राज अंकल मुझे अपनी गोद मे बैठाते हुए मेरे होंठो को चूम रहे थे, अचानक उन्होने मेरे बालो को ज़ोर से पकड़ लिया और मेरे नीचे के होठ को काट दिया, उस के साथ ही सुबह जैसा गाढ़ा और गरम रस वापस निकला लेकिन अबकी बार वो मेरी चड्डी मे ही समा गया, कुछ मेरी चूत के पास भी गया.
राज अंकल मुझे अपनी गोद मे उठाते हुए किचन मे ले गये वाहा मुझे ज़मीन पे खड़ा किया और इसके साथ ही मेने ख़याल रखा कि उनका लंड कही मेरी चड्डी से बाहर निकल ना जाए. फिर अंकल ने जूस बनाया और हम दोनो ने उसे एक ही ग्लास से पी लिया. राज अंकल काफ़ी हत्ते कत्ते थे जो मुझे उठा के चल रहे थे और उन्होने मुझे किचन से हॉल मे सोफे पे अपनी गोद मे बिठा दिया. वो मुझे फिरसे चूमने लगे, और चूमते हुए मुझे पूछा “ जया तुम मेरे पास क्यू आती हो, तुम्हे डर नही लगता के कोई देख लेगा तो, या फिर कोई और बजह जो तुम मुजसे दोस्ती कर रही हो”.
मेने उनकी ओर देख के कहा “ मेरा अब तक कोई फ्रेंड नही बना है मेरे मम्मी पापा की लव मेर्रिज है, वो दोनो हर वक़्त झगड़ते रहते है, जिससे मेरा मन भी इन सभी रिस्तो से भर आया था, जब आपने मुझे ये सुख दिया तो मे आपकी ऐएहसान मंद हो गयी और हर वक़्त आपके साथ होने का ऐएहसास करने लगी.”
राज अंकल ने मुझे घर जाते समय मेरे होंठो को प्यार से चूमते हुए कहा “जया अब तुम घर जाओ और कल सुबह आ जा ना नये आसन करेंगे.”
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